जनश्रुति एवं लेखों में:ः नन्दा
कुटिला लिपि में लिखित बदरीनाथ के चार ताम्रपत्रों में स्पश्ट किया गया है कि कत्यूरी वंष में कार्तिकेयपुर (वर्तमान जोषीमठ) के राजाओं में ललितसुरदेव, पदमदेव और सुभिक्षराज ने नन्दादेवी को अपनी ईश्टदेवी घोशित की थी। यह ताम्रपत्र नौवीं सताब्दी के प्रतीत होते हैं। उनके द्वारा सम्पूर्ण गढ़-कुमाउँ में नन्दा के पावन मन्दिरों का निर्माण किया […]
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