राजजात में बारहथोकी ब्राह्मणों का समान महत्व है। राज-छांतोली को कैलाष तक पँहुचानें केवल तीन ब्राह्मण जाति का अधिकार है। इसलिए पूजा विधान भी तीन भागों में बँटी हैं-
राजगुरू नौटियाल- काँसुवा-नौटि-जाख बनाणी-नौटि-काँसुवा से महादेवघाट (चाँदपुरगढ़ी के मध्यमार्ग तक) तक।
कोटी के ड्यूंडी और कुनियाल ब्राह्मण- महादेव घाट (चाँदपुर गढ़ के समीप) से होमकुण्ड तक तथा नन्दकेषरी से सरकोट-बमणबेरा-बानुड़ी-द्योथोलि (देवस्थली) के कुनियाल ब्राह्मणों का पूजा अधिकार।
होमकुण्ड में राजगुरू नौटियाल, ड्यूंडी और कुनियाल तीनों मिलकर राज छंतोली व चैसिंग्याखाडू की पूजा सम्पन्न करते हैं। षेश छंतोलियों की पूजा अन्य ब्राह्मण करते हैं।
