द्वितीय पड़ाव- पुनः नौटी

यात्रा मार्ग- ईड़ाबधाणी से जाख-दियारकोट होते हुए नौटी में विश्राम
राजजात दूसरे दिन ईड़ाबधाणी से रिठोली, जाख, दियारकोट, कुकड़ई, पुडियाणी, कनोठ, झुरकण्डे, नैणी होते हुए पुनः नौटी आती है। नौटी समुद्रतल से 1650 मीटर की ऊँचाई पर सुरम्य उफराई ठोंक की तलहटी पर बसा हुआ है। यह स्थल दूर से देखने में ऐसा लगता है मानो कोई पर्वतपाद प्रदेष हो।
यह पड़ाव काँसुवा और चाँदपुरगढ़ी की भाँति किसी पहचान की मोहताज नहीं है। राजगुरू नौटियाल का मूल गाँव कई विशेषताओं को संजोये हुए है। यहाँ जात के लिए मनौती मेला का स्थल, प्रतिबर्श आयोजित होने वाले हरियाली-पूड़ा मेला के लिए प्रसिद्ध, देवीभाश्ययन्त्र का षक्तिपीठ भूमि के लिए प्रसिद्ध आदि इस पड़ाव की मुख्य विशेषतायें हैं। नंदा को बेटी की भाँति नौटी से तीसरे दिन राजकुँवरों के गाँव लिए विदा की जाती है। यह जात का तीसरा दिन होता है। यात्रा नौटी में राजजात के समय दो बार आती है।

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