यात्रा मार्ग- नौटी से देवल-नौना-होते हुए पुनः काँसुवा में विश्राम राजजात नौटी से चलकर घटगाड, देवल, बैनोली, मलेठी, ऐरोली, मज्याड़ी, आली, पयां आदि में अपने मायके वालों को मिलकर पुनः काँसुवा में आगमन कर विश्राम करती है। यहाँ राजराजेश्वरी का थान है। जो नंदा की बड़ी बहन है। राजराजेश्वरी और नन्दा के मिलन के बाद दोनों की पूजा एकसाथ की जाती है। पूजा के समय भक्तजन देवीय षक्ति के भावावेश में रम जाते हैं। स्थानीय ग्रामवासी नाचने लगते हैं। आसपास के गांवों की छाँतोलियां आभूशण और उपहारों से सुसज्जित होकर जात में शामिल होती है।
