मानवषास्त्रियों का अध्ययन केन्द्र:ः रूपकुण्ड (छाया चैरड़ी)

इस पैदल यात्रामार्ग में लगभग 17500 फीट की ऊँचाई पर स्थित रूपकुण्ड कई रहस्यों को समेटे हुए है। रूपकुण्ड आने वाले यात्रीयों के लिए कौतूहल उत्पन्न करने वाला स्थान है। इस प्राकृतिक कुण्ड के चारों ओर छितराए असाधारण नर कंकाल तथा अस्थि पंजर मानव विज्ञानवेताओं के लिए प्रकृति का निषुल्क षोध का खजाना है। रूपकुण्ड रहस्य व रोमांचकारी कथाओं से रू-ब-रू होने का अवसर प्रदान करता है। इसके अलावा रूपकुण्ड में अभी भी घोड़ों की जाँगें, काठी, पंजे, षरीर में बाल और मांस आदि देखने को मिलता हैं।

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