राजजात यात्रा मार्ग 280 किमी में से लगभग 200 किमी0 का पैदलपथ जितना रमणीय, सुंदर और सुखद है उतना ही विस्मयकारी, साहसिक और कठिन पहलुओं को अपने आप में संजोये है। स्थानीय समाज के लोकगीत, जागरों, पवाणों, पौराणिक कथाओं को सुनने से ही देवी का अपने मायके से ससुराल जाने का करुण जनमानस की आंखों को नम करती है।
संपूर्ण विश्व में एक मात्र विशिष्ट, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक व साहसिक यात्रा नंदादेवी राजजात- सन् 2014 के बाद फिर से असंख्य तीर्थ यात्रियों को संपूर्ण रूप से जानने, समझने, षोध करने और आनंद लेने का मौका बर्श 2026 में मिलने का सौभाग्य प्राप्त होगा। सन् 2026 की राजजात जात्रा कई मायनों में पिछली यात्राओं से अलग से देखने को मिलेगी। यह ’’हिमालयी सचल कुम्भ राजजात यात्रा’’ भारत की प्रगाढ़ सांस्कृतिक, एकता, और मानवता कल्याण के लिए भी प्रसिद्ध है।
