उन्नीसवाँ पड़ाव- नन्दानगर (वापसी)

यात्रा मार्ग- सुतोल से चलकर पंजाजोखा-पेरी-त्रिषूलघाटी धार या कनोल (पैदल)-गुलारी-गैरी- सितेल-बागवान-कमुरतोली होते हुए नन्दानगर में विश्राम
नन्दानगर समुद्रतल से 1331 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। नन्दाकिनी के सहारे चलते हुए यात्री दल नन्दानगर में विश्राम करता है। सुतोल से सितेल तक बांज, बुंराष, कैल, चीड़ के घनघोर जंगल जो कि वानस्पतिक विविधता के लिए अनोखी जगह है।
सन् 2000 की राजजात तक सड़कमार्ग नन्दानगर तक ही था। तब राजयात्री सुतोल से नन्दानगर तक पैदल आकर विश्राम करते थे। परन्तु सन् 2014 की यात्रा में नन्दानगर से सुतोल तक सड़क बन चुकी है। इसलिए अधिकांष राजयात्री सुतोल से सड़क साधनों से कर्णप्रयाग या अपने गन्तव्य को निकले। परन्तु राजगुरू और राजकुँवर का दल अपने निर्धारित पड़ाव नन्दानगर में विश्राम करते हैं।
वापसी मार्ग में बनियार, प्राणमति, झिंझोणी, जोखना, बूरा, पडेरगाँव, टाँगला, गुलाड़ी, घूनी, रामणी, पगना, जैतोली, मथकोट, कुमजंग, नारंगी, फरकेत, काण्डा, लुणतुरा के ग्रामीणी राजयात्रियों दर्षन और होमकुण्ड का प्रसाद ग्रहण करने आते थे। परन्तु सन् 2014 की जातयात्रा में कही देखने को मिला।
यहाँ पर परिवहन एवं आवासीय की पूर्ण सुविधा है। इसी कारण कतिपय राजयात्री नन्दप्रयाग या कर्णप्रयाग भी विश्राम के लिए आते हैं।

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