चैदहवाँ पड़ाव- बेदनी बुग्याल

यात्रा मार्ग- गैरोलीपातल से वैतरणी-वेदनीकुण्ड-वेदनीबुग्याल में विश्राम
सन् 2014 में नन्दा अश्टमी का दिन आगे होने के कारण गैरोली पातल को पड़ाव बनाया गया था। गैरोली पातल से वेदनीकुण्ड सबसे कब दूरी वाला यात्रा पड़ाव बन गया था।
 वैतरणी कुंड में पित्र-तर्पण करने की परम्परा
बेदनी कुण्ड को बैतरणी कुण्ड भी कहते हैं। यहाँ पर राजकुँवरों द्वारा अपने पूर्वजों और कन्नौज के राज-परिवार यशोधवल के यात्रा के समय मृतकों की आत्मषान्ति के लिए ’’पितृ तर्पण’’ देने की परंपरा भी है। ब्राह्मणों द्वारा कुण्ड के चारों ओर सूत या जनेऊँ के तागे का घेरा बनाकर राजकुँवर के हाथ से पित्र-तर्पण और उनका आर्षीवाद लिया जाता है। ताकि आगे की यात्रा निर्विध्न सम्पन हो सके। बेदनी बुग्याल के समीप ही आली बुग्याल है। जो यहाँ आने वाले धर्मावलम्बी और तीर्थाटकों को आकर्शित करता है।
वेदनी बुग्याल के बीच स्थित बेदनीकुंड की सुंदरता अद्भुत है। 4-5 किमी चढ़ने के बाद भी इस कुंड का मनोरम दृष्य देखने को मिलता है। इस कुण्ड में हिमालय की परछाई अत्यंत मनोहारी एवं आर्कशित करने वाली होती है। बेदनी की हल्की ढलानों में उगी बुग्याल किसी मैदान में बिछी ’’मखमली चादर’’ का आभास कराती है। यहाँ सैकड़ों प्रजाति के पुष्प व जड़ी-बूटियां हंै। परन्तु अत्यधिक मानवीय आवागमन से ’’इकोलोजी सिस्टम’’ प्रभावित हो रहा है। जिसका प्रमाण सन् 2014 की राजजात में स्वयं अपनी आँखों से देखा है।
 रमणीक स्थल:ः आली बुग्याल
बैदनी से रूपकुंड जाने के लिए राजजात मार्ग के विपरीत दिषा की ओर एक और रास्ता है। इस मार्ग पर एक किमी0 दूर सुन्दर एवं रमणीक आली बुग्याल स्थित है। ब्रिटिश षासन के दौरान गढ़वाल के तत्कालीन कलक्टर बर्नाडी को यह बुग्याल बहुत भा गया था। जोखिम भरे पथ पर चलने के षौकीन बर्नाडी हर फरवरी-मार्च में आली बुग्याल में हफ्तों गुजारा करते थे इतना ही नहीं स्नो-स्कीनिंग के षौकीन लोग बर्नाडी को देखने के लिए आते थे। बर्नाडी ने आली बुग्याल को स्कीनिंग के लिए विश्व का सबसे बेहतर ढलान माना था। बर्नाडी द्वारा निर्मित बंगला आली में जीर्ण-क्षीर्ण दशा में मौजूद है। इस बंगले का निर्माण बनोली गांव के ठेकेदार महेन्द्र सिंह षाह ने किया था। बर्नाडी के द्वारा स्कीनिंग के लिए सुझाया गया आली बुग्याल हिम क्रड़ा केन्द्र आज तक नहीं बन पाया। अन्यथा स्कीनिंग के षौकीनों को बर्फ की कमी का अहसास नहीं होता। इस रमणीक बुग्याल को उत्तराखण्ड के पर्यटक माचचित्र पर लाने की आवष्यकता है।

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