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कैसेटों के माध्यम से भी सांस्कृतिक धरोहर की जानकारी

सन् 2000 ई0 से आधुनिक प्रिन्ट एवं इलैक्ट्रोनिक मिडिया के प्रयोग ने भी इस ऐतिहासिक विरासत की गाथा को नई पीढ़ी तक पँहुचाने में बड़ी मदद की है। पिछली राजयात्रा के समय निर्मित आॅडियो-विडियो कैसेटों के माध्यम से इससे जुड़े जागरों, झुमैलो, चैंफुला बाजूबन्द से भी जनमानस परिचित हुए हैं। इस कड़ी में गढ़वाल के […]

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चतुर्थ भाग (चाँदपुरगढ़ किला)

गढ़-नरेषों की राजसत्ता की प्रतीक: चाँदपुरगढ़ी दुर्ग राजजात का आरम्भिक स्थल रही चाँदपुरगढ़ी के इतिहास को जानना अति आवष्यक है। राजजात के समय महाराजा टिहरी नरेष के हाथों से पूजा होती है। सन् 2000 में स्व0 महाराजा मानवेन्द्रषाह द्वारा की गई। सन् 2014 में महाराजा मनुजेन्द्रषाह और राजपरिवार के ठा0 भवानी सिंह के हाथों हुई।आज

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