कैसेटों के माध्यम से भी सांस्कृतिक धरोहर की जानकारी

सन् 2000 ई0 से आधुनिक प्रिन्ट एवं इलैक्ट्रोनिक मिडिया के प्रयोग ने भी इस ऐतिहासिक विरासत की गाथा को नई पीढ़ी तक पँहुचाने में बड़ी मदद की है। पिछली राजयात्रा के समय निर्मित आॅडियो-विडियो कैसेटों के माध्यम से इससे जुड़े जागरों, झुमैलो, चैंफुला बाजूबन्द से भी जनमानस परिचित हुए हैं। इस कड़ी में गढ़वाल के प्रख्यात गायक नरेंद्र सिंह नेगी जागर सम्राट प्रीतम भरत्वाण, बधाण लोक सांस्कृतिक संस्था आदि ने कैसेटों/विडियो/सी0डी0 के माध्यम से लोगों को राजजात की जानकारी दी है। श्री नेगी द्वारा प्रस्तुत नन्दाराजयात्रा कैसेट में राजजात की सांस्कृतिक यात्रा की शुरूआत कुछ इस तरह की है जो आजतक भी आम से खास त्योहारों, कार्यक्रमों, स्कूली कार्यक्रमों में सुनने को अवष्य मिलता है-
जै जै बोला जै भगोती नंदा, नंदा ऊंचा कैलाश की,जै
जै बोला तेरु चैसिंग्या खाडू, तेरी छंतोली रिंगाल की जै
जै बोला।
काली कुलसारी की देवी उफरांई की, नन्दा-राजराजेष्वरी।
बगोली का लाटू की, हीत बिणेसर की, नन्दा-राजराजेष्वरी।
ईड़ा-बधाणी की, जमनसिंहजड़ौदा की,
कांसुवा कुंवरों की, नंदा राज-राजेष्वरी।
जै, जै बोल माता मेणावती तेरा पिताजी हेमंत की जै।
किसी भी मंच पर इस लोकजात्रा-गीत की प्रस्तुति पर सभी संस्कृति प्रेमी आज भी झूम उठते हैं। उन्होंने नंदा देवी के संध्या गीत पर भी अपनी शानदार प्रस्तुति दी। दर्वान नैथ्वाल व मीना राणा की स्वरिचत गीत-‘नंदा राजजात मां नंदा देवी तैं अर्पित’ नन्दा रावत द्वारा ’’छांतोली रिगांल की’’, दिगम्बर सिंह बिश्ट द्वारा………….. गढ-कुमाऊँ के कई गीतकारों द्वारा नई पीढ़ी को नंदादेवी के इतिहास से परिचित कराया। आज गढ़वाली गीतों के प्रति नई पीढ़ी का लगाव कम हो रहा है। परन्तु इसके पिछे बाजार में निकलने वाली तमाम कैसेट भी जिम्मेदार हैं क्यों कि कई प्रस्तुतियों में मूल धुनों और कथावस्तु का अभाव भी देखने और सुनने को मिल रहा है। उत्तराखण्ड़ की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने में गीतकारों के साथ वर्तमान पीढ़ी की भी जिम्मेदारी है।
उपरोक्त सबके अतिरिक्त नंदाकिनी नदी के बारे में कहा जाता है कि इसका जल अषुद्ध है यह बड़ी भूल है। नंदाकिनी बहुत पवित्र नदी है। गढ़वाल विश्वविद्यालय के उपाचार्य डा0 डी0 आर0 पुरोहित द्वारा किये गये षोध में कहा गया कि नंदा-महाकाव्य के बनने पर एक नये जीवन के दर्षन भी होगें। स्थानीय जागरीयों, षोधकर्ताओं, कवियों, गीतकारों, की यह खोज समाज के लिए अद्वितीय होगा और नंदादेवी का इतिहास संरक्षित होगा। आधुनिक प्रौद्योगिकी युग में स्व0 गुलषन कुमार स्थापित ’’टी सीरीज’’ ने नंदा-यात्रा को कैसेट को लोगों तक पँहुचानें में विक्रम सिंह रावत के प्रयासों भुलाया नहीं जा सकेगा। काव्यहृदयी एवं बहुप्रतिभा के धनी उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ0 रमेष पोखरियाल ’’निषंक’’ द्वारा उत्तराखण्ड का महाकुम्भ नंदाराजजात यात्रा पर प्रकाषित फोटो-फीचर आकर्शक एवं अद्वितीय है।
6-राष्ट्र को अध्यात्मिक चेतना का संदेश देती है नंदा-राजजात
श्री नंदादेवी राजजात को लेकर श्रद्धालुओं में जो अपार श्रद्धा, उत्साह, उमंग और भगवती के प्रति अटूट विश्वास दिख रहा है उससे लगता है कि इस युग की यह महायात्रा राष्ट्र को आध्यात्मिक चेतना का संदेश देने में सार्थक सिद्ध होती है। इस यात्रा में सम्मिलित होने के लिए हजारों की संख्या में देषी-विदेषी पर्यटकों में भारी उत्साह व उमंग रहता है।

दूरसंचार एवं इंटरनेट की दुनिया में भी राजजात का आरम्भ बर्ष 2000 में नंदादेवी राजजात की वेबसाइट का उद्घाटन तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री डा0 मुरली मनोहर जोशी द्वारा दिल्ली स्थित शास्त्री भवन में पहली बार किया जा चुका है। करेगें। जिसमें राजजात समिति के तत्कालीन एवं वर्तमान महामंत्री भुवन नौटियाल आदि दिल्ली में उसके साक्षी बने थे। यूसेक द्वारा भी इस क्षेत्र में कार्य किया गया था।
इन बारह बर्शों के अन्तराल में उत्तराखण्ड राज्य सरकारों, चमोली जिलाप्रषान, चमोली जिलापंचायत, समस्त क्षेत्रपंचायतों और राजजात से जुड़े प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष ग्रामपंचायतों द्वारा इस दिषा में में काफी प्रयास किये गये है। परन्तु कुछ बर्शों से बाहरी सहायता के अभ्यस्थ बनने से इसके आयोजन एवं स्वरूप में परिवर्तन दिखाई पड़ने लगा है। सरकारी धन को आस्था और विष्वास उपर रखकर देखा जा रहा है। बारह थोकी एवं चैदह सयाना, थोकदारी व्यवस्था, रहने-खाने की व्यवस्था, पड़ाव स्थलों का निर्धारण करते समय उस विश्राम स्थल के गाँव की आस्था के साथ सामथ्र्य का ध्यान रखा गया था। इसलिए राजजात से जुड़े विशयों के निर्धारण एवं फसलों को राजनैतिक चष्मे से नहीं देखकर लेना होगा।
केन्द्रीय गढ़वाल वि0वि0 श्रीनगर, कुमाऊँ वि0वि0 नैनीताल आदि के मानवषास्त्रीयों, इतिहास विभाग और उत्तराखण्ड अन्तरिक्ष उपयोग केन्द्र देहरादून द्वारा राजजात मार्ग का चिन्हिकरण आदि विषिश्ट योगदान बर्श 2013 में आयोजित होने वाली नन्दा राजजात को भव्यता प्रदान करेगा।

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