वैदिक षास्त्रों के अनुसार भारत भूमि में 84 करोड़ देवी-देवता वास करते हैं। इस दृश्टि से पर्वतराज हिमालय की गोद में बसे उत्तराखण्ड या उत्तराँचल के लिए यह कथन सत्य प्रतीत होता है। क्योंकि हिमालय को देवताओं की आत्मा भी कहा गया है। एक उक्ति के अनुसार ’’कोष-कोष पर बदले पानी, चार कोष पर बदले बानी’’ के आधार पर प्रत्येक गाँव-जाति-तालुका-क्षेत्र का गहन-अध्ययन किया जाय तो एक ही देवी-देवता को अलग-अलग नाम या षक्ति के रूप में पुकारे और पूजे जाते हैं। यहीं नहीं उनकी पूजा-पद्यति या यजमानी अधिकार भी अलग-अलग रूप में देखने को मिला हैं। अतः नन्दा ही ऐसी देवी है, जिसे सम्पूर्ण गढ़-कुमाऊँ में एक नाम से पूजते हैं।
