(नन्दा के मैत का आखिरी पड़ाव)
यात्रा मार्ग- कोटि से घतोड़ा-नौलापानी-कण्डवालगाँव-छैकुड़ा-मनौड़ा होते हुए भगोती में विश्राम
देवी का यह विश्रामस्थल राश्ट्रीय राजमार्ग 87 कर्णप्रयाग-ग्वालदम-अल्मोड़ा पर नारायणबगड़ के समीप स्थित हैं। पिण्डरनदी के बाम पाष्र्व पर 1500 मीटर की ऊँचाई पर भगौती (भगवती गाँव) बसा है। इस गाँव का नामकरण नन्दा भगवती के नाम से हुआ है। यह पड़ाव नारायणबगड़ राश्ट्रीय राजमार्ग पर होने से देष के विभिन्न क्षेत्रों से आये यात्रीगण षीधे षामिल होते हैं। एषिया की सबसे लम्बी पैदल यात्रा का सरकारों द्वारा काफी प्रचारित-प्रसारित किया जा रहा है। इसे कुम्भ पैर्टन पर आयोजित करने की भी बार-बार माँग होती आयी है।
कोटी से भगोती पड़ाव तक यात्रियों को 12 कि0मी0 पैदल यात्रा मार्ग बीहड़ जंगलों व गांवों की पगडंडियों से होकर गुजरता पड़ता है। कहीं-कहीं पर मार्ग इतना खतरनाक है कि क्षेत्रीय लोग यात्रियों की सुरक्षा को लेकर आशंकित है। नौलापानी से फरगलिया व छैकुड़ा तक दुर्गम चट्टानी रास्ता है। इसी मार्ग में घतोड़ा में जनमानस के कौतुहल के लिए देवी के पहलवानों (अंग रक्षक) का आपस में मलयुद्ध होता है। नन्दा पदयात्रा घतोड़ा, बमियालागांव, कण्डवालगाँव, चैड़ीखाल होते हुए अपने ’’मैत’’ (मायका) क्षेत्र के अन्तिम गाँव भगौती में पँहुचती है।
यात्रामार्ग में कफोली, झिझोंणी, पंखोली, जखदानू भूम्याळ, बुडेरा, नलगाँव श्रीगुरू, गण्डिक, ग्वाड़, मौणा गाँव नन्दा भक्ति से सराबोर होते हैं। राजजात भगोती से प्रस्थान कर कुलसारी की ओर प्रस्थान करती है
| क्र0 सं0 | देव डोली का नाम | कहाँ से आगमन |
| 1 | कण्डवाल गाँव की पारम्परिक छंतोली | कण्डवाल गाँव (नारायणबगड़) |
| 2 | छैकुड़ा की पारम्परिक छंतोली | छैकुड़ा |
| 3 | मनोड़ा की पारम्परिक छंतोली | मनोड़ा |
