यात्रा मार्ग- सेम से प्रस्थान कर धारकोट- सिमतोली-घनियाल होते हुए कोटि में विश्राम
पवित्र स्थल समुद्रतल से लगभग 1630 मीटर की ऊँचाई पर अनेक भौगोलिक विविधताओं को धारण किये हुए है। भक्तों द्वारा अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए देवी की कोटि-कोटि अर्थात बार-बार प्रार्थना की जाती है। इसलिए इस स्थान का नाम कोटी पड़ा। सीरी के उपर सितोलीधार होते हुए जात कोटी गाँव पँहुचती है। कोटि में भगवती की पाशाणयुगीन कला में काले पत्थर की मूर्तियाँ हैं। यहाँ ड्यूंडी ब्राह्मणों द्वारा पूजा की जाती है। मन्दिर के गर्भगृह से दो जलधारायें निकलकर सम्मुख बने वर्गाकार कुण्ड में प्रवाहित होते हैं।
इस पड़ाव मार्ग में सिरोली, भटोली, चूलाकोट, एरवाड़ी, सलियाणा, नैल, खांकर, ऐरवाड़ी, सीरी, सिरपा, द्वालघाट, कैलूखील, घण्डियाल, सिमतोली, बेनीताल गाँव भी नन्दामय हो जाते हैं। राजजात कोटी से प्रस्थान कर भगोती की ओर प्रस्थान करती है।
यात्रा पड़ाव मार्ग में सम्मिलित प्रमुख देव डोलियाँ
क्र0सं0 देव डोली का नाम कहाँ से आगमन
1 रतूड़ा की पारम्परिक छंतोली रतूड़ा
2 खण्डूड़ा की पारम्परिक छंतोली खण्डूड़ा
3 केदारूखाल की पारम्परिक केदारूखाल
4 थापली की पारम्परिक छंतोली थापली
5 बगोली के लाटू की छंतोली ब्गोली
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