प्राचीन मंदिरों का दर्षन करायेगीःः नन्दा जात्रा

भाद्रपद षुक्लपक्ष (अगस्त माह) में आयोजित होने वाली विश्व की सबसे लंबी 280 कि0मी0 (200 किमी0 पैदल) धार्मिक ऐतिहासिक यात्रा षामिल होने वाले लोगों को जहाँ एक ओर पुरातात्विक महत्व के मंदिरों के दर्शन होते हैं। वहीं प्रकृति प्रेमियों को प्रकृति के अनछुए नजारों से साक्षात्कार होने का अवसर मिलता है।
यात्रियों को आदिबदरी मंदिर श्रृंखला एवं चाँदपुरगढ़ी के ऐतिहासिक दुर्ग के साथ-साथ सेम, भगोती, पंती, मींग, कुलसारी, नंदकेशरी, देवाल, ल्वाणी व लोहाजंग आदि स्थानों में कई पुरातन महत्व के मंदिरों के दर्शन करने का अवसर मिलता है।
बरसाती उफनते नाले जो भाद्रपद में अपने पूरे यौवन के साथ कभी ऊंची-ऊंची कुलांचे भरते हैं तो कभी झरने, कभी झील के रूप में प्रकृति प्रेमियों के हृदय को उद्वेलित करते हैं। राजजात के चार पड़ाव पिंडर नदी के सहारे से लगे हुए हैं। नदी के पल-पल में बदलता-स्वरूप प्रकृति के पुजारियों को मंत्रमुग्ध करता है।

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